Tuesday, September 17, 2019

कश्मीर: विवादास्पद मौतों के कारण तनाव

असम के बाद अब उत्तराखंड भी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी (नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिजन्स) को लागू कर सकता है.
जनसत्ता के अनुसार प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि मंत्रिमंडल के साथ होने वाली अगली बैठक में विषय पर विचार किया जाएगा.
अख़बार के अनुसार उत्तराखंड के कई इलाक़ों में बांग्लादेश के लोग रहते हैं, इसी को लेकर एनआरसी क संभावना पर विचार शुरू हुआ है.
अमर उजाला में छपी एक ख़बर के अनुसार उत्तर प्रदेश की 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के प्रदेश सरकार का एक और कोशिश को झटका लगा है. हाई कोर्ट ने सरकार के 24 जून 2019 के आदेश पर रोक लगा दी है.
गोरखपुर के सामाजिक कार्यकर्
जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष राज्य का दर्जा ख़त्म करने के बाद क्षेत्र में हुई कई मौतों को लेकर परस्पर विरोधी दावे किए जा रहे हैं.
इन परस्पर विरोधी दावों के आख़िर क्या कारण हैं, यही जानने के लिए बीबीसी संवाददाता योगिता लिमये ने श्रीनगर शहर में कुछ मामलों की पड़ताल की.
छह अगस्त को 17 साल का असरार अहमद ख़ान उस समय ज़ख्मी हो गया जब वह अपने घर के बाहर सड़क पर था.
इस घटना के चार सप्ताह के बाद उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया.
'मेधावी छात्र' कहे जाने वाले और खेल का शौक़ रखने वाले असरार अहमद ख़ान की मौत जिन हालात में हुई वो इस बात की ताज़ा मिसाल है कि न केवल किसी की मौत पर बल्कि इन दिनों भारत प्रशासित कश्मीर की बहुत सारी घटनाओं पर परस्पर विरोधी दावे किए जा रहे हैं.
घटना के समय उसके साथ मौजूद उसके एक दोस्त का कहना है कि शाम को अपनी ड्यूटी से वापस लौट रहे भारतीय अर्धसैनिक बलों के जवानों ने उस पर गोली चलाई.
अंसार की मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि एक आंसू गैस के गोले के​ विस्फोट के कारण उसकी मौत हुई. हालांकि कश्मीर में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन का कहना है कि प्रदर्शनकारी सशस्त्र बलों पर पत्थर फेंक रहे थे और उन्हीं में से एक पत्थर असरार को लगा जिससे उनकी मौत हो गई.
कश्मीर पु​लिस ने बीबीसी को बताया कि वे भी सेना के अधिकारी के इस बयान पर क़ायम हैं. उन्होंने अस्पताल की रिपोर्ट को संदिग्ध क़रार दिया और कहा कि इसकी आगे जाँच की ज़रूरत है.
यह घटना भारत सरकार के उस घोषणा के एक दिन बाद हुई जिसमें जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा समाप्त कर दी गई थी और साथ ही राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटने की घोषणा की गई थी.
अप्रत्याशित तरीक़े से किए गए इस घोषणा से ठीक पहले कश्मीर में कई हज़ार अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया गया था. अमरनाथ तीर्थयात्रा रद्द कर दी गई थी और स्कूल एवं कॉलेजों को बंद कर दिया गया था.
पर्यटकों को जल्द से जल्द घाटी से जाने के लिए कहा गया और टेलीफोन एवं इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थी. इसके अलावा बीजेपी को छोड़ पूर्व मुख्यमंत्री समेत राज्य के सभी प्रमुख नेताओं को नज़रबंद कर दिया गया था.
एक रिपोर्ट कार्ड से पता चलता है कि अंसार ने दसवीं के स्कूली परीक्षा में 84 प्रतिशत अंक अर्जित किए थे. एक अख़बार के पुराने क​टिंग में छपी एक तस्वीर में वह किक्रेट की एक ट्रॉफ़ी पकड़े हुए नज़र आ रहा है.
असरार के ​पिता ने बीबीसी से पूछा, "क्या मोदी मेरा दुख महसूस कर सकते हैं? क्या वह इसके लिए माफ़ी मांगेंगे? क्या उन्होंने इसकी निंदा की है?"
उन्होंने आगे कहा, "कल और मौतें होंगी. आज कश्मीर में किसी की कोई जवाबदेही नहीं है."
ता गोरख प्रसाद की याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राजीव मिश्र की पीठ ने कहा है कि जातियों को अनुसूचित या पिछड़ा घोषित करने का अधिकार संसद को है.
कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार से तीन सप्ताह में जवाब भी मांगा है.
हिंदुस्तान टाइम्स की की एक ख़बर के अनुसार उत्तर प्रदेश के हरदोई में 20 साल के एक दलित व्यक्ति को घर में बंद कर पीटने और फिर उसे जला देने के आरोप में लखनऊ पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए लोगों में दो महिलाएं शामिल हैं.
घटना सोमवार की है जब अभिषेक नाम के एक व्यक़्ति को जलाया गया. बुरी तरह जल जाने के कारण अभिषेक ने शविनार को दम तोड़ दिया.
अख़बार के अनुसार ये मामला कथित तौर पर ऊंची जाति की 19 साल की एक लड़की से संबंध रखने से जुड़ा हो सकता है. हालांकि अख़बार को एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि लड़की के एक रिश्तेदार इसे पारिवारिक बदले की घटना बता रहे हैं.
अभिषेक की मौत की ख़बर सुनने के बाद उसकी मां की भी मौत हो गई थी.

Thursday, August 22, 2019

شراء غرينلاند: ترامب ينتقد رد الدنمارك 'البغيض' بعد إلغاء زيارته

وصف الرئيس الأمريكي دونالد ترامب رد فعل رئيسة وزراء الدنمارك ميتي فريدريكسن تجاه فكرة شراء جرينلاند بأنه "بغيض".
وألغى ترامب، زيارته المقررة إلى الدنمارك بعد رفض حكومتها بيع جزيرة غرينلاند للولايات المتحدة، ووصف مسؤوليها للاقتراح بأنه "سخيف".
وكان من المقرر أن يزور الرئيس الأمريكي الدنمارك زيارة رسمية بدعوة من الملكة مارغريت الثانية، في 2 سبتمبر/أيلول، لكن الزيارة ألغيت بعد إعلان رئيسة وزراء الدنمارك أن غرينلاند ليست للبيع.
وفي حديثه للصحفيين في حديقة البيت الأبيض بعد ظهر الأربعاء، أعرب ترامب عن امتعاضه إزاء تصريحات فريدريكسن.
وقال "اعتقد أن تصريح رئيسة الوزراء بأن العرض سخيف، وأن الفكرة سخيفة كان بغيضا".
وأضاف "في رأيي البيان غير مناسب. كل ما كان عليها فعله هو قول لا، لسنا مهتمين بالعرض".
وكان ترامب قد اقترح أن الولايات المتحدة مهتمة بشراء غرينلاند، وهي إقليم دنماركي مستقل.
ووصفت رئيسة الوزراء الدنماركية ميت فريدريكسن، الاقتراح بأنه "سخيف" وقالت إنها تأمل ألا يكون ترامب جادا فيما يقول.
وانتقد ترامب رد المسؤولة الدنماركية البارزة قائلا "إنها لا تتحدث معي. إنها تتحدث إلى الولايات المتحدة الأمريكية. أنت لا تتحدث إلى الولايات المتحدة بهذه الطريقة، على الأقل في عهدي".
وأثار تأكيد البيت الأبيض لإلغاء الزيارة، دون تحديد موعد آخر، انتقادات واسعة لترامب في الدنمارك.
ووصف زعيم حزب الشعب الدنماركي الشعبوي، كريستيان تولسين دال قرار إلغاء الزيارة بـ "المهزلة"، واتهم النائب المحافظ الدنماركي راسموس جارلوف ترامب بعدم احترام بلاده.
وقال وزير الخارجية السابق كريستيان جنسن إن تحرك ترامب أدى إلى "فوضى تامة".
ووصف بيرنيل سكيبر المتحدثة باسم تحالف الخضر ترامب بأنه "يعيش على كوكب آخر" بينما قال بيا كيارسجارد، الرئيس السابق للبرلمان الدنماركي، إن ترامب أظهر "سلوكًا فظًا تجاه الشعب الدنماركي والملكة".
وكان الرئيس قد أكد في وقت سابق تقارير رغبته في شراء غرينلاند. ورد على سؤال يوم الأحد حول تفكيره في مبادلة الجزيرة بأراض أمريكية: "حسنا، يمكن القيام بالكثير من الأشياء".
وقال "إنها في الأساس صفقة عقارية كبيرة".
وتم رفض هذا الاقتراح من جانب مسؤولي غرينلاند والمسؤولين الدنماركيين. وقال رئيس حكومة الجزيرة كيم كيلسن: "غرينلاند ليست للبيع، لكن غرينلاند مفتوحة للتجارة والتعاون مع دول أخرى، بما في ذلك الولايات المتحدة الأمريكية".
لارس لوكي راسموسن، رئيس الوزراء الدنماركي السابق، قال عن اقتراح ترامب بأنه "يجب أن يكون مزحة كذبة أبريل".
بينما انتقد سورين إسبيرسن، متحدث الشؤون الخارجية لحزب الشعب الدنماركي الشعبي، بشدة اقتراح ترامب، وقال لإذاعة دي أر.: "إذا كان (ترامب) يفكر حقا في هذا، فهذا دليل جديد على أنه قد جن جنونه".
غرينلاند هي أكبر جزيرة في العالم (بعد أستراليا، وهي قارة بحد ذاتها). وهي إقليم دنماركي مستقل، يقع بين شمال المحيط الأطلسي والمحيط القطبي الشمالي، وتبلغ مساحتها 2 مليون كيلومتر مربع، وتتمتع بالحكم الذاتي في ظل السيادة الدنماركية ولها حكومتها وبرلمانها.
ويبلغ عدد سكانها حوالي 56 ألف شخص يتركزون حول الساحل. ما يقرب من 90 في المائة السكان ينحدرون من السكان الأصليين غرينلاند الاسكيمو.
تغطي الثلوج أكثر من 80 في المائة من مساحة الجزيرة، وهناك مخاوف من ذوبان الغطاء الجليدي بسبب الاحتباس الحراري. لكن ذوبان الجليد زاد من إمكانية الوصول إلى الموارد المعدنية للجزيرة.
لكن يعتقد أيضا أن الجليد المتراجع قد يكشف عن نفايات نووية سامة تركت في عدة مواقع عسكرية أمريكية خلال الحرب الباردة.

لماذا يهتم ترامب بهذه الفكرة؟

يقال إن الرئيس الأمريكي اهتم بغرينلاند، جزئيا، بسبب مواردها الطبيعية، مثل الفحم والزنك والنحاس وخام الحديد.
ولكن في حين أن غرينلاند قد تكون غنية بالمعادن، إلا أنها تعتمد حاليا على الدنمارك في تمويل ثلثي ميزانيتها. كما أنها تعاني من معدلات عالية من الانتحار وإدمان الكحول والبطالة.
وكشف شخصان مطلعان على المفاوضات لصحيفة نيويورك تايمز الأمريكية عن سر اهتمام ترامب بالجزيرة وهي "أهميتها للأمن القومي" بسبب موقعها.
لطالما رأت الولايات المتحدة أن الجزيرة مهمة استراتيجيا وأنشأت قاعدة جوية ومحطة رادار هناك في بداية الحرب الباردة.
ووصف النائب الجمهوري مايك غالاغر، فكرة ترامب بأنها "خطوة جيوسياسية ذكية".
وقال: "الولايات المتحدة لديها مصلحة استراتيجية ملحة في غرينلاند، وهذا يجب أن يكون على الطاولة"
هل حاولت الولايات المتحدة شراء غرينلاند من قبل؟
تم طرح فكرة شراء غرينلاند لأول مرة في ستينيات القرن التاسع عشر، في عهد أندرو جونسون.
وفي هذا الإطار يتحدث تقرير لوزارة الخارجية الأمريكية يرجع تاريخه إلى عام 1867 عن الأهمية الاستراتيجية لغرينلاند مع الإشارة إلى مواردها الواعدة، وأن فكرة الاستحواذ عليها مثالية.
ولكن لم يحدث تحرك رسمي حتى عام 1946 عندما عرض هاري ترومان على الدنمارك 100 مليون دولار مقابل الجزيرة. وكان قد عرض في وقت سابق مقايضة أراض في ألاسكا مع مناطق استراتيجية في غرينلاند.

Friday, July 5, 2019

राजकुमारी हया शेख़ मोहम्मद के साथ

अगर आप नहीं चुका पाते हैं तो आप कर्ज़ के दलदल में फंस जाएंगे जहां आपको मजबूर किया जाएगा कि आप चुकाते ही जाएं, बस चुकाते ही जाएं.
इंडक्शन विंग (जहां नये क़ैदी आते हैं) में यह चीज़ सबसे ज़्यादा दिखती है, क्योंकि यही वह जगह है जहां रहने वालों को सबसे ज़्यादा परेशानी होती है.
यहां क़ैदियों के लिए सबसे कम इंतज़ाम होते हैं (पैसे होने पर भी पहली कैंटीन में जाने के लिए उन्हें एक या दो हफ्ते इंतज़ार करना पड़ता है) और वे सबसे ज़्यादा मासूम होते हैं.
मेरा मतलब यह है कि बहुत से लोग उधार लेते हैं और वापस चुका भी देते हैं. लेकिन अगर आपने वापस नहीं चुकाया तो आपके साथ बहुत ही बुरा होगा.
आपकी पिटाई होगी, उंगलियों को सेल के दरवाजे़ में फंसाकर दबा दिया जाएगा और हो सकता है कि आप मज़ाक बनकर रह जाएंगे.
चरम स्थितियों में लोग सिर्फ़ खीरे खाकर ख़ुद की कमज़ोर कर लेते हैं और कमजोर क़ैदियों के वार्ड में या दूसरी जेल में तबादले की कोशिश करते हैं.
लेकिन (जेल के) मठाधीश क़ैदी मूर्ख नहीं हैं. वे देनदारों के परिवार की पूरी जानकारी रखते हैं. यदि देनदार से पैसे नहीं मिल रहे हों तो परिवार को निशाना बनाया जाता है.
बैंक और वित्तीय संस्थाएं कर्ज वसूली के लिए कानूनी तौर पर सरकारी वर्दीधारी लठैतों को भेज सकते हैं, लेकिन (जेल के) मठाधीश यही काम अपने गुंडों से कराते हैं.
सच कहा जाना चाहिए, भले ही उतना बड़ा अंतर न हो.
माशूका की कथित बेवफ़ाई पर लिखी ये पंक्तियां किसी शायर या कवि ने नहीं लिखी हैं. इन्हें लिखा है दुबई के शासक शेख़ मोहम्मद अल मक़तूम ने, जिनकी पत्नी राजुकमारी हया बिंत अल हुसैन दुबई छोड़कर लंदन चली गई हैं.
संयुक्त अरब अमीरात के शाही परिवार में ऐसा होना अपने आप में बेहद अजीब है.
बताया जा रहा है कि राजकुमारी फ़िलहाल सेट्रल लंदन के किसी टाउनहाउस में हैं. राजुकमारी हया अक्सर घुड़दौड़ में हिस्सा लिया करती थीं लेकिन वो इस साल हुए रॉयल एस्कॉट से ग़ैरहाज़िर रहीं.
राजकुमारी हया का जन्म मई 1974 में हुआ है. उनके पिता जॉर्डन के किंग हुसैन थे जबकि मां महारानी आलिया अल-हुसैन थीं.
जब राजकुमारी हया सिर्फ़ तीन साल की थीं तब एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मां की मौत हो गई थी.
राजकुमारी हया ने अपना बचपन ब्रिटेन में बिताया. उन्होंने दो प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई पूरी की. इनमें ब्रिस्टल का बैडमिंटन स्कूल और डोरसेट का ब्रयानस्टन स्कूल शामिल हैं.
इसके बाद उन्होंने ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी से राजनीति, दर्शन और अर्थशास्त्र में पढ़ाई की.
अपने कुछ पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बताया था उन्हें फै़लकोनरी (बाज़ को पालना) शूटिंग और बड़ी मशीनों का शौक है. इसके अलावा उन्होंने दावा किया था कि जॉर्डन में बड़े ट्रक चलाने का लाइसेंस पाने वाली वो एकमात्र महिला थीं.
राजकुमारी हया को घुड़सवारी का भी शौक है और जब वो 20 साल की थीं तो उन्होंने घुड़सवारी को अपने करियर के तौर पर चुना था.
घुड़सवारी में राजकुमारी हया ने साल 2000 के ओलंपिक खेलों में जॉर्डन का प्रतिनिधित्व भी किया था, वो उस ओलंपिक खेलों में अपने देश की ध्वजवाहक भी थीं.
10 अप्रैल 2004 को राजकुमारी हया ने दुबई के शासक और संयुक्त अरब अमीरात के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शेख़ मोहम्मद के साथ निकाह किया. उस समय राजकुमारी की उम्र 30 साल थी जबकि शेख़ मोहम्मद 53 साल के थे.
राजकुमारी हया उनकी छठीं पत्नी थीं. बताया जाता है कि शेख मोहम्मद के अलग-अलग पत्नियों से कुल 23 बच्चे हैं.
राजकुमारी की तरह शेख मोहम्मद को भी घोड़ों का शौक था. वो घोड़ों के अस्तबल गो-डोल्फिन के मालिक़ भी थे. इन दोनों की शादी अम्मान में हुई थी.
शादी के बाद राजकुमारी हया ने कई बार शेख मोहम्मद के साथ अपने रिश्तों के बारे में बताया कि वो बहुत ख़ुश हैं. दोनों ने अपनी ख़ुशहाल ज़िंदगी को दर्शाने वाली पेंटिंग भी बनवाई.
अमीरात वुमेन मैगज़ीन के 2016 के अंक में राजकुमारी हया ने शेख मोहम्मद के बारे में कहा था, ''वो जो कुछ भी करते हैं तो अद्भुत होता है. मैं हर रोज़ ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करती हूं कि मैं उनके इतना क़रीब हूं.''
इसी मैगज़ीन में राजकुमारी हया और शेख़ मोहम्मद को एक परफेक्ट जोड़े को तौर पर पेश करते हुए भी आर्टिकल प्रकाशित किया गया था.

Tuesday, July 2, 2019

在国内采矿可以免除泰国对进口钾碱的依赖

《地球》(Earth有时看起来更像是一页页慢放的幻灯片,而不是一部电影。其中展示的景象也并非独一份,同样的还有爱德华·波利斯基拍摄的反映环境污染的照片,以及乔什·哈纳从空中拍摄的受气候变化影响地区的图片,哈纳还在其中穿插了一些受影响人群的特写。中国摄影师卢广则是另外一位拍摄人类活动影响的摄影大师

《地球》(Earth影片中拍摄的所有矿井都位于北半球,这些地区监管更严格,环境与安全记录通常也更完善。而记录南半球采矿作业的人所面临的处境往往非常危险。 《地球》一片中最后一位受访者珍·罗蒙库尔来自加拿大艾伯塔省麦凯堡。在加拿大的这片地区,石油开采给一些人带来了财富,却让所有人蒙受了巨大的环境代价。对于居住在被矿井包围的油砂中的加拿大原住民罗蒙库尔来说,她面临的不仅是一场无声而英勇的战斗,而且也是一个信仰被践踏的悲剧。她认为,地球母亲也是有灵魂的,而采矿就相当于伤害了地球母亲。

“就在这南边有一个大型露天矿,那里有一个尾矿池。他们虽然对此存疑——但是我知道——它正在慢慢渗入地下水和河流。所以他们建议我们不要食用河里的鱼。”对于生活在可开采资源中央和附近的土著居民来说,他们比采矿者、水坝建设者和棕榈种植者更适合做大自然的监管人,但是也是因为这点他们的命运反而变得更加糟糕。生物多样性和生态系统服务政府间科学政策平台(IPBES)负责人安娜·玛利亚·埃尔南德斯在近日接受采访时表示

“当地居民依靠生物多样性为生,并且直接依靠这些生态系统服务……他们不仅有权发言,而且同样可以根据他们的经验和与生态系统的关系为我们的环保行动提供解决方案。不听取他们的意见就是第一个错误。”由于当地民众的强烈反对,泰国东北部一座规划中的钾碱矿工程陷入了僵局。当地居民担心,这个项目可能会严重威胁他们的生计、健康和生态环境。

去年,一个由沙功那空府(   )哇暖尼越郡(  )当地妇女领导的小队阻断了通往当地钾碱矿勘探钻井场的道路。作为回应,明达钾盐(泰国)有限公司(  Ta  廉价化肥是推动中国农业产量的提升一个重要原因。中国是目前全球最大的钾肥消费国。钾碱(又称碳酸钾)是一种富含钾元素的盐,能够提高作物产量、增强作物保水性和抗病性

中国农民使用的钾肥主要来自加拿大、俄罗斯和白罗斯。但是去年钾碱价格暴涨近25% 2014年,泰国军队发动政变成立军政府,并宣布将加大泰国矿产资源开采力度,借此推动泰国经济发展。

2015年,泰国副总理比蒂耶通·德瓦古叻在一次商会上表示:“泰国钾碱矿储量巨大,总量约为4000亿吨,而且基本没有进行商业开发。目前,政府已经开始支持钾碱矿开发。”

也是在这一年,中国国企中国明达钾盐(泰国)公司获准在沙功那空府12万莱(约合1.92公顷)的土地上进行钾碱矿开采

除了获得丰厚的企业利润,泰国政府还希望通过这项措施减少钾碱进口依赖。据统计,泰国每年进口的钾碱总量在70万吨。,居高不下的价格让中国决定寻找新的、更加廉价的钾碱供应源。

这次,中国将目光锁定在了泰国东北部丰富的钾碱资源上

该地区横跨呵叻盆地(  )和沙功那空盆地(   )两大主要钾碱矿,拥有多年的矿盐生产基础。但是由于当地居民强烈反对,加上环保问题和法律限制,这些资源在20世纪70年代被发现后一直处于未开发状态。)对参与抗议的村民提起了大规模诉讼,追偿损失额高达3400万泰铢(约合100万美元)。

与此同时,即将离任的泰国军政府是否会修改法规、支持国际采矿企业而忽略本国环境保护和民众权利,一切还是未知。

Tuesday, June 25, 2019

प्रेस रिव्यूः जेल से बाहर आ सकते हैं राम रहीम

दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में जेल में सज़ा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम जेल से बाहर आ सकते हैं.
हिंदुस्तान समाचार पत्र में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, राम रहीम ने जेल प्रशासन से 42 दिन की पैरोल मांगी है. हरियाणा के जेल मंत्री कृष्णलाल पवार ने बताया कि इस पर फैसला प्रशासन को लेना है लेकिन नियमों के अनुसार राम रहीम को पैरोल मिल सकती है.
जेल मंत्री ने कहा कि दो साल सज़ा भुगतने के बाद दोषी पैरोल के हक़दार होते हैं. अगर किसी का जेल में अच्छा आचरण होता है तो पैरोल दी जा सकती है.
इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने भी कहा है कि अगर राम रहीम शर्तों को पूरा करते हैं तो पैरोल की अनुमति दी जाएगी.
गुरमीत राम रहीम ने हरियाणा के सिरसा ज़िले में अपने खेतों में खेती करने के लिए एक महीने से अधिक की पैरोल मांगी है. वह रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं.
पाकिस्तान में बालाकोट पर भारत की एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी वायुसेना ने भारत के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमलों की नाकाम कोशिश की थी, लेकिन उनके विमान नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार नहीं कर सके थे. यह जानकारी एयर चीफ़ मार्शल बी.एस. धनोआ ने दी है.
नवभारत टाइम्स में प्रकाशित समाचार के अनुसार, अख़बार के संवाददाता ने एयर चीफ़ मार्शल से पूछा कि करगिल के दौरान पाकिस्तान भारत के एयरस्पेस में आने की हिम्मत नहीं कर पाया, लेकिन बालाकोट के बाद वह आया, इन 20 साल में क्या बदल गया?
इसके जवाब में एयर चीफ़ मार्शल ने कहा, ''वह हमारे एयरस्पेस में नहीं आए. उनमें से कोई लाइन ऑफ़ कंट्रोल (एलओसी) क्रॉस कर हमारे इलाक़े में नहीं आया. यह देखना होता है कि हमारा ऑब्जेक्टिव क्या था और उनका क्या था? हमारा ऑब्जेक्टिव बालाकोट में स्ट्राइक करना था, जो हमने सफलतापूर्वक हासिल किया. उनका (पाकिस्तान) ऑब्जेक्टिव हमारे आर्मी के ठिकानों पर हमला करना था, वह नहीं कर पाए.''
27 फरवरी को विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तानी वायुसेना ने भारतीय वायुसीमा का उल्लंघन करते हुए भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की थी. तब एयरफोर्स ने भी कहा था कि पाकिस्तानी एफ़-16 घुस आया था, जिसे मार भगाया गया.
ससंद की वित्त मामलों की स्थायी समिति की मानें तो देश में कितना कालाधान है इसका पूरी तरह पता लगा पाना बहुत मुश्किल है.
संसद को सौंपी गई रिपोर्ट में समिति ने बताया कि कालेधन को लेकर जितने भी आंकड़े देश में मौजूद हैं वो सिर्फ़ अनुमानों पर आधारित हैं.
द हिंदू में
जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने हाल ही में ऐसे संकेत दिए थे कि अलगाववादी नेता बातचीत के लिए तैयार दिख रहे हैं. इसके बाद अब बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने भी बातचीत की पहल आगे बढ़ाने की बात कही है.
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित समाचार के अनुसार, अविनाश राय खन्ना ने कहा है, ''हमारे दरवाज़े सभी के लिए खुले हैं, बस वह बातचीत भारत के संविधान के दायरे में होनी चाहिए.''
हाल ही में हुर्रियत के चेयरमैन मिरवाइज उमर फ़ारूक़ ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा था कि अगर दिल्ली से बातचीत के लिए सकारात्मक पहल होगी तो वे भी इस दिशा में आगे बढ़ेंगे.
प्रकाशति ख़बर के अनुसार, देश के तीन संस्थान, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ पब्लिक फ़ाइनेंस एंड पॉलिसी, द नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फ़ाइनेंशियल मैनेजमेंट और नेशनल काउंसिल ऑफ़ एपलाइड इकोनॉमिक रिसर्च ने यह रिपोर्ट पेश की.
इस रिपोर्ट के अनुसार कालेधन की मात्रा देश की जीडीपी के 7 से लेकर 120 प्रतिशत के बीच है.

Sunday, June 9, 2019

هل نعاني من الإمساك دون أن ندري؟

يقول باحثون إن ثمة اختلافا في الرأي بين الأطباء والجمهور حول أعراض الإمساك، مما يفوت على بعض من الذين يعانون من هذه الحالة فرصة الحصول على النصح والعلاج اللازمين.
فقد خلصت دراسة إلى أنه بينما يؤمن الأطباء بأن تباعد فترات التبرز يشكل علامة مهمة لوجود خلل أو مرض، لا يؤمن بذلك الا أقل من ثلث العامة.
وقال فريق البحث الذي أعد الدراسة - وهو من كلية كينغز كوليج في العاصمة البريطانية لندن - إن ثمة حاجة ماسة لوضع تعريف جديد للإمساك، تعريف يعتمد على التجارب التي يمر بها المرضى.
وقالت منظمة Guts UK الخيرية المعنية بهذه الأمور، "هذا يعني أن النقاش حول موضوع الغائط والتغوط لم يعد محرما."
يذكر أن الإمساك حالة واسعة الانتشار جدا، إذ يعاني منه واحد من كل سبعة أشخاص ليست لديهم أي مشاكل صحية أخرى.
وغني عن القول إن الإمساك يعني الصعوبة في التغوط، ولكن الطرق المتبعة في تشخيصه تختلف اختلافا واسعا.
ويقول الباحثون إن قائمة مجموعات الأعراض أدناه قد تساعد في بلورة تعريف جديد للإمساك:
وبينما يظهر معظم الذين يقولون إنهم يعانون من الإمساك اعراضا تتوافق مع المعايير الرسمية، لم يتعرف ثلث المصابين "الأصحاء" على اعراض الإمساك التي يعانون منها ابدا.
كما كشف البحث أن الأطباء والعامة غير متفقين على الظواهر والأعراض التي ينبغي رصدها وتتبعها.
فالأطباء يولون تباعد فترات التبرز أهمية خاصة باعتبارها عرضا من أعراض الإمساك، لكن نصف العامة فقط من الذين يقولون إنهم مصابون بالإمساك عانوا من هذا العرض.
قالت رئيسة فريق البحوث، الدكتورة إيريني ديميدي، التي تعمل في كينغز كوليج، "قد يشير البحث الذي أجريناه إلى أن أولئك الذين يطلبون المساعدة لعلاج أعراض الإمساك التي يعانون منها لا يحصلون في كل الحالات على التشخيص والعلاج اللازمين."
وأضافت الدكتورة ديميدي إن غياب الأطعمة الليفية والسوائل من الغذاء هو السبب الرئيسي للإمساك، ولكن الإمساك قد يكون عرضا لأمراض أخرى كسرطان الأمعاء الغليظة أو داء الرتوج (انفتاق الغشاء المخاطي للأمعاء) أو الداء الزلاقي (مرض يصيب الجهاز الهضمي كرد فعل على التعرض لمادة الجلوتين الموجودة في الخبز).
وقالت ديميدي إنه "من المهم دائما أن تستشير الطبيب اذا لاحظت وجود أي اعراض معوية."

وماذا عن الخبراء الآخرين؟

تقول جولي هارينغتون، التي تعمل مع جمعية Guts UK الخيرية، إن الاستماع لما يقوله المرضى عن الإمساك أمر مهم جدا.
وتضيف "فالمرضى هم الخبراء نتيجة التجربة، وعندما يتفقون مع الاخصائيين تكون تلك غاية المراد."
وتقول إن ثمة أشكال مختلفة للإمساك، وان الذين يعانون منه يظهرون اعراضا مختلفة.
وتوضح "أن تشخيص مشاكل الأمعاء أقل ترجيحا من تشخيص أمراض أجهزة الجسم الأخرى، لأن الذين يعانون منها ينتظرون عادة من 6 إلى 12 شهرا قبل مراجعة الطبيب وذلك مرده الخوف والاحراج."
وتضيف "يجب أن تكون على اتصال وثيق بجسمك."

ما هي وتيرة التبرز المثالية؟

من الصعب الإجابة على هذا السؤال، فالوتيرة تختلف اختلافا كبيرا بين شخص وآخر.
ولكن البحث أظهر أن المعدل بين غير المصابين بالإمساك يبلغ سبع عمليات تبرز في الأسبوع الواحد.
إلا أن خبراء يقولون إن الوتيرة الطبيعية تتراوح بين ثلاث عمليات تبرز في اليوم وثلاث في الأسبوع.
ولذا من الضروري أن يتعرف المرء على ما هو طبيعي بالنسبة له، ومن ثم الانتباه إلى أي تغيير قد يحصل.

ما هي خيارات العلاج؟

حسب الارشادات التي أصدرتها خدمة الضمان الصحي في بريطانيا فإن معظم الناس بامكانهم التعرف على الحالة بأنفسهم ويحاولون التصدي لها بزيادة تناول الأطعمة المحتوية على الألياف والإكثار من شرب السوائل.
ومن الأغذية الغنية بالألياف الخبز الأسمر والمعكرونة السمراء والفواكه والمكسرات والحبوب والبقول.
ومن الأمور التي قد تساعد في التخلص من الإمساك ممارسة الرياضة وتناول الوجبات بانتظام.
واذا أخفقت كل هذه الاجراءات، يمكنك اللجوء إلى تناول الأدوية الملينة.
ولكنه من الضروري مراجعة الطبيب إذا استمرت المشكلة واذا كانت هناك أعراض أخرى.

Wednesday, May 22, 2019

أصبحت غالبية الأراضي الزراعية في ولايتي "كوينزلاند" و"نيوساوث ويلز" قاحلة جرداء

هناك التقيت غاري نان، المسؤول عن معهد مالون، وهو عبارة عن مؤسسة بحثية وتعليمية تُعنى بأساليب الزراعة المستدامة التي تستهدف تجديد التربة. وأشار الرجل إلى نباتات العليق التي قطّعها فريقه، والتي أصبحت تسد الآن جانبا من بركة ماء موجودة هناك، وتساعد على ترشيح ما فيها من مياه.
ويتخذ المعهد - الذي يدعم أفكار أندروز - من مخزن للحبوب قريب من بركة أُطلِق عليها اسم هذا الرجل مقرا له، ويعكف على تدريس أسلوب الزراعة بطريقة التسلسل الطبيعي، للمزارعين والعلماء وطلاب الجامعات.
ويتعاون ذلك المعهد مع جامعات أسترالية لمراقبة وضع المياه على طول الجدول المائي الموجود في هذه المنطقة. ويقول رئيسه إنه تبين
وفي الوقت الراهن، يعمل فريق الخبراء الذي يقوده نان في منطقة أخرى من الجدول، تمتد على طول 43 كيلومترا إضافية منه وتمر عبر 20 ألف هكتار من الأراضي الزراعية. ويسعى الفريق لتكوين سياج من الأعشاب المُرشِّحة للمياه عبر الجدول، مثل جدار السد. ويتشكل هذا السياج من أحجار، توضع في الشقوق الموجودة بينها أعشاب شجر العليق المُقطّعة، لترشيح المياه المتدفقة وإبطاء وتيرة تدفقها.
وللدلالة على نجاح هذا الأسلوب، عادت مياه الجدول لتجري الآن من جديد بمناسيبها المعتادة، بالرغم من قلة الأمطار التي تهطل على هذه المنطقة. كما أن اللون الأخضر عاد ليكسو الأراضي، التي كانت يوما ما قاحلة التربة ومتآكلة من الجفاف.
ويعود ذلك إلى فاعلية تلك الأسيجة التي تُستخدم فيها الأعشاب، إذ تسمح للتربة بامتصاص قدر أكبر من الرطوبة، ما يُمَكِّن النباتات من النمو على طول ضفتي الجدول.
ويقول نان في هذا الشأن: "تسحب الأعشاب الضارة الطاقة من المياه وتعيد ترطيب التربة".
ويقول نان إن العملية برمتها تشبه تخليق "قطع ضخمة من الإسفنج باستخدام الأعشاب الضارة".
ويضيف: "ما تعلمناه هو أنه لا يجب عليك أبدا التخلص من أعشاب ضارة، قبل أن نفهم الوظيفة التي كانت تؤديها. وجود الكثير منها يعني أن ثمة مشكلة تتعلق بخصوبة التربة. وإذا اقتلعتها سيتعين عليك أن تضع محلها نوعا آخر من النبات".
ومن هذا المنطلق، يمكن أن يتمثل الحل الأفضل في تقطيع تلك الأعشاب، ووضعها عبر مياه جدول، كذاك الموجود قرب معهد مالون.
وحسبما يقول نان، فإن هذا الأسلوب يجعل النباتات الأسترالية المستوطنة تنمو من جديد، وهو ما حدث بالفعل لبعضها التي بدأت في النمو على طول ذلك الجدول المائي.

امتصاص الكربون

ومن مواطن الجمال في الأعشاب الضارة أنها تعمل على امتصاص الكربون، إذ أنها تقوم باستخلاصه من الهواء وتخزنّه في صورة أخرى، ما يعني أنها قد تساعد على الحد من ظاهرة التغير المناخي.
وتقول كريستا أندرسون، باحثة في مجال المناخ من الولايات المتحدة، إن "بوسع الغابات والمحيطات والتربة بأنواعها المختلفة امتصاص ثاني أكسيد الكربون من الهواء وتخزينه"، مشيرة إلى أن القدر الذي يمكن امتصاصه من هذا الغاز في أي نظام بيئي يعتمد على مكان وجود ثاني أكسيد الكربون فيه وكيف يتم التعامل معه.
وتوضح أن الغابات تتحلى بقدرة أكبر على تخزين الكربون، ما يجعل بمقدورها المساعدة على تقليص انبعاثات ثاني أكسيد الكربون وغيره من الغازات الدفيئة.
وتقول أندرسون إن هناك الكثير من أساليب الزراعة، التي يمكن أن تزيد من إمكانية تخزين قدر أكبر من الكربون، مضيفة أن هناك "حاجة لإزالة الكربون من الهواء، من خلال تحسين مسألة إدارة الغابات وحماية الأهوار والأراضي والأعشاب البحرية، وكذلك تحسين طرق الزراعة لدينا".
وفي الوقت الحاضر، يتساءل العلماء عما إذا كان بمقدور مشروعات صغيرة، مثل ذاك الموجود على طول جدول "مالون" المائي، أن تتحول إلى "بئر لامتصاص الكربون" من أجل إعادة الموائل الطبيعية إلى حالتها الأصلية، حال استخدام عدد كافٍ من المزارعين الموجودين فيها طريقة الزراعة بالتسلسل الطبيع للعلماء أن الزراعة بطريقة التسلسل الطبيعي، زادت تدفق المياه ورفعت منسوبها.